Wednesday, November 21, 2012





Art Of Living:
v   जीवनको विशाल दृष्टीकोनसे  देखो... सुख-दुख आयेंगे... सुखमे सेवा और दुखमे त्याग करो..
v   हम चाहते ही... सब मेरे जैसे हो.....पर हमारे सामने अगर अपने जैसा कोई दुसरा आया तो हम ५ minut के लिये बर्दाश नही कर सकते..... ऐसा नाही हो सकता....अपने आपको पेह्चानो... जो जैसा ही उसे वैसा हि स्वीकार करणा....स्वीकार करनेसे मन शांत होगा.....और धैर्य मिलेगा...हिम्मत मिलेगी...
v   दुसरे लोग  अपने बारेमे क्या सोचते ही... ये मत सोचो.... जिनको जो सोचना ही सोचने दो.....किसीकी फुटबॉल मत बनो... हमेशा सच कि राहपर चलो...
v  एक व्याक्तिका विकास होणा हो तो ३ दिन दो...
o   एक दिन उसे जेल भेजो ....जेलमे लोगोंको देखकर ... आपके दिलमे करुणाका भाव आयेगा...क्षमाका भाव आयेगा....... नफरत दूर हो जायेगी....
o   दुसरे दिन पागलखाने बीठाव.... सभी पागलोन्को देखकर आपको गुस्सा नही आयेगा...आपके अहंकारको कोई चोट नही पहुचा सकता.... दुनियामे ऐसे बहुत सारे पागल है...
o   तिसरा दिन ... अस्पताल....दुखीयोन्के साथ १ दिन बीताव.... आपका दुख दूर हो जायेगा.....दुखमे त्याग और सुखमे सेवा करो...........
v  सबके साथ प्रेमसे रहो.....और वर्तमानमे जीओ...
                                          ~श्री रविशंकरजी 





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