Art Of Living:
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जीवनको विशाल दृष्टीकोनसे
देखो...
सुख-दुख आयेंगे... सुखमे सेवा और दुखमे
त्याग करो..
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हम चाहते ही... सब मेरे जैसे हो.....पर हमारे सामने
अगर अपने जैसा कोई दुसरा आया तो हम ५ minut के लिये बर्दाश नही कर सकते..... ऐसा नाही
हो सकता....अपने आपको पेह्चानो... जो जैसा ही उसे वैसा हि स्वीकार करणा....स्वीकार
करनेसे मन शांत होगा.....और धैर्य मिलेगा...हिम्मत मिलेगी...
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दुसरे लोग अपने बारेमे
क्या सोचते ही...
ये मत सोचो....
जिनको जो सोचना
ही सोचने दो.....किसीकी फुटबॉल मत
बनो... हमेशा सच कि
राहपर चलो...
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एक व्याक्तिका
विकास होणा हो तो ३ दिन दो...
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एक दिन
उसे जेल भेजो ....जेलमे लोगोंको देखकर ... आपके दिलमे करुणाका भाव आयेगा...क्षमाका
भाव आयेगा....... नफरत दूर हो जायेगी....
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दुसरे
दिन पागलखाने बीठाव.... सभी पागलोन्को देखकर आपको गुस्सा नही आयेगा...आपके अहंकारको
कोई चोट नही पहुचा सकता.... दुनियामे ऐसे बहुत सारे पागल है...
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तिसरा
दिन ... अस्पताल....दुखीयोन्के साथ १ दिन बीताव.... आपका दुख दूर हो जायेगा.....दुखमे
त्याग और सुखमे सेवा करो...........
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सबके साथ
प्रेमसे रहो.....और वर्तमानमे जीओ...
~श्री रविशंकरजी

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